Wednesday, March 18, 2020

इत्र की बूँद : Drop of Attar : Story by Kapil Jain 15.03.2020

Happy Birthday Daddy
My Daddy Late Shri Karam Vir Jain
Born : March 15th, 1927
Eternity : July 29th, 1990

आज डैडी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर उनकी यादों में,
कुछ हकीकत , कुछ अफ़साना

इत्र की बूँद : Drop of Attar : Story by Kapil Jain

दिल्ली के लाल किले के सामने ऐतिहासिक बाज़ार चाँदनी चौक की शुरुआत जैन मंदिर जो लाल मंदिर के नाम से विख्यात हैं से होती है , मेरे डैडी सप्ताह में एक बार दर्शन को ज़रूर जाते थे , जब हो सके तो हम बच्चें भी साथ जाते थे ।
एक बार हम मंदिर में देव दर्शन के बाद चांदनी चौक के भीड़ भरे बाज़ार से गुजर कर दरीबा कलां के सोने चाँदी के आभूषण के मुगल कालीन बाज़ार में किसी व्यक्ति से मिलने के लिये जा रहे थे ।

दरीबा कलां बाज़ार में खुशबू इत्र महक बेचने के लिये एक दुकान जो गुलाब गन्धी के नाम से करीब सौ साल से मशहूर हैं , के सामने से गुजरे , दुकान में सजी खूबसूरत शीशियों में भरे रंग बिरंगे द्रव्य , और उनसे आकर्षित होकर ज़रा से करीब जाते ही , मादक खुशबू , वाह क्या बात थी ।

मैने डैडी से पूछा यह कैसी दुकान हैं , डैडी ने जवाब दिया बहुत ही ख़ास दुकान हैं , आओ देखे , डैडी ने दुकानदार से कहा की मिट्टी का इत्र को सुंघाईये , दुकानदार ने एक शीशी से एक हल्की बूँद मेरे हाथ पर लगाई , मैने जब सूँघा तो अवाक रह गया , मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबू , जैसे पहली बारिश के बाद पल दो पल के लिये आती है , जैसे नये नये मिट्टी के घड़े के पहले दो तीन दिन पानी पीने में आती हैं , यह मिट्टी का इत्र कैसे बनाया ? यह अनुभव शब्दों में कैसे बयान करूँ ?

गुलज़ार साहिब के शब्दों में :
सिर्फ़ अहसास हैं यह रुह से महसूस करो ...

डैडी ने दो किस्म इत्र खरीदे , पहली मिट्टी और दूसरी गुलाब
वापसी के रास्ते में डैडी ने बताया ,

गुलाब का इत्र , हज़ारो फूलों को मसल कर एक बूँद इत्र बनता हैं , इस ही तरह एक अनुभवी व्यक्ति अपने अनेक अनुभव की सफलता असफलता से अर्जित ज्ञान को कभी बताये लिखे, तो सुनो , पढो , परखों ।

मिट्टी का इत्र , एक हुनर को दर्शाता है , अनेकानेक प्रयोगों के बाद तय हुई एक विधि , यानी पल दो पल के लिये आती खुशबू को एक तरल बनाकर एक शीशी में बंद करने की विधि ।

कोई भी हुनर, औरों से श्रेष्ठ हो तो उचित व्यापारिक लाभ से धन कमाने का आधार , जैसे यही इत्र की दुकान , इस तरह की बीसियों इत्र बेचने की दुकानों में इनके पास सर्वश्रेष्ठ हुनर हैं ।
आज यह बात हुऐ पैंतीस चालीस साल हुऐ होंगें , बीते कल की बात लगती हैं , आज भी किसी भीड़ में अकेले हुऐ तो अगले ही पल अपना बेचैन हाथ डैडी के मजबूत हाथों में थामे पाया ।

Kapil Jain with Kamini Jain
Noida, Uttar Pradesh, INDIA
March 15th, 2020
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Monday, February 10, 2020

Ulhane Ke Laddoo : Story By Kapil Jain

उल्हाने के लड़डू : Story by Kapil Jain

मम्मी जी का स्वर्गवास हुऐ आज आठ साल हुऐ , उन्ही के शब्दों में कहूँ तो अगर अतीत याद आये तो ख़ुशगवार पल याद करो , अतः उन्हें श्रदांजली स्वरूप , हमारी खूबसूरत ज़िन्दगी का उत्सव , छोटी छोटी बातो में,

मेरी उम्र कोई दस गयारह साल रही होगी , एक शाम जब खेल कूद कर घर पहुँचा तो खाने के मेज़ पर एक लड़डू से भरे डब्बे को देख खुश हो गया , झट से एक लड्डू खाया , जैसे ही और खाने के लिये हाथ बढ़ाया , मम्मी ने रसोई से कहा , अब पहले खाना खा लो

लड़डू बहुत ही मजेदार था, यह कहाँ से आये ? घर पर बनाये लगते हैं ? , हलवाई वाला स्वाद नही हैं ? मैंने पूछा 

हाँ सही हैं , कँचन और कविता की माँ सविता बहनजी ने अपने हाथों से बना कर यह लड़डू भेजे हैं, सिर्फ़ हमे ही नही, सारे मोहल्ले भर को बड़े प्यार से भेजे हैं , बात हमारे साथ के मकान के परिवार की थी, 

मैने पूछा क्यूँ ? क्या खुशी हैं तो मम्मी ने हँसते हुऐ बताया की कंचन और कविता के चार साल के भाई यानी आकाश ने आज गली में एक और पड़ोसी जिन्हें हम विम्मी आंटी कहते थे , के घर कोई छोटी मोटी शैतानी कर दी थी, इसकी शिकायत विम्मी आंटी ने आकाश की माँ से कर दी, इस शिकायत यानी उल्हाने से खुश होकर उन्होंने यह लड्ड़ू भेजे हैं

मैने पूछा यह अजीब बात हुई ? कुछ बात समझ नही आयी , यानी आकाश के शरारत से उपजी शिकायत में खुशी में लड़डू बाटने की क्या वजह हो सकती हैं ?

मम्मी जी ने बताया की सविता बहनजी, आकाश के बहुत देर से चलने बोलने और बचपन की कम गतिविधियों की वजह से हमेशा से बहुत ही चिंतित रहती थी , मैंने हमेशा उन्हें कहा था की आकाश बिलकुल ठीक हैं , कितना खूबसूरत हँसता खेलता बच्चा हैं , कोई कोई बच्चा थोड़ी ज्यादा समय से चलते बोलते हैं , असल समस्या सविता बहनजी की थी आकाश की नही , कंचन और कविता से बारह साल छोटे आकाश का कमजोर पैदा होना , इस बारह साल के बीच में दो और बच्चे हुऐ और छः छः महीने भी जीवित नही रहे , बहुत ही मानसिक वेदना से गुजरी थीं  

आज जब आकाश अपनी शैतानी का उल्हाना लाया तो उन्हें यकीन हो गया की सब बिल्कुल ठीक हैं , इस ही खुशी में लड्डू बटे हैं , शायद कोई मन्नत पूरी हुई हैं भगवान सबको हँसी खुशी दीर्घआयु दे

आज चालीस साल बीते , आकाश अब सिंगापुर में अपने परिवार के साथ रहता हैं और फेसबुक पर लगातार सम्पर्क में हैं

Kapil Jain with Kamini Jain
Kapilrishabh@gmail.com
February , 2020
Noida , U.P. India
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