Tuesday, February 3, 2015

hamse kahe kuch dost hamare

हमसे कहे कुछ दोस्त हमारे , मत लिखो,
जान अगर प्यारी है प्यारे, मत लिखो

हाकिम की तलवार मुकदस् होती है
हाकिम की तलवार के बारे , मत लिखो ,

बस वो लिखो जो अमीरे - शहर कहे ,
जो कहते है दर्द के मारे , मत लिखो ,

खुद मुन्सिफ़ पाबस्ता है लब-बस्ता है
कौन कहा अब अर्ज़ गुजरे, मत लिखों,

दिल कहता है , खुल कर सच्ची बात लिखो ,
और लफ्ज़ों के बीच सितारे , मत लिखो,

हमसे कहे कुछ दोस्त हमारे , मत लिखो,
जान अगर प्यारी है प्यारे, मत लिखो.....

                           ........अहमद फ़राज़

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